प्रसव पूर्व देखभाल की परिभाषा?HealthPlanet

Posted on Tue 25th Feb 2020 : 21:24

गर्भावस्था में जरूरी है प्रसव पूर्व देखभाल, जानिए क्या हैं इसके फायदे
मां बनना जिंदगी का सबसे सुखद अहसास है। जिस पल गर्भ में भ्रूण आता है, उस पल से एक नई जिंदगी शुरू हो जाती है। इसलिए गर्भावस्था में बहुत जरूरी है कि महिलाओं का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाए। मां और उसके पेट...
गर्भावस्था में जरूरी है प्रसव पूर्व देखभाल, जानिए क्या हैं इसके फायदे


मां बनना जिंदगी का सबसे सुखद अहसास है। जिस पल गर्भ में भ्रूण आता है, उस पल से एक नई जिंदगी शुरू हो जाती है। इसलिए गर्भावस्था में बहुत जरूरी है कि महिलाओं का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाए। मां और उसके पेट में पल रहे बच्चे की स्वास्थ्य देखभाल, उन्हें जरूरी परामर्श देना और साधन उपलब्ध कराना, प्रसव पूर्व देखभाल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 4 से 5 दिसंबर को एंटीनेटल केयर गाइलाइंस पर पैनल मीटिंग रखी थी।
गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं को पता लगाना और उनका हल निकालना महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था के दौरान पेट में पल रहे शिशु को प्रसव के पहले पोषण और विटामिन की जरूरत है। मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में जन्म दोष को रोकने के लिए प्रसव पूर्व के विटामिन्स की रोजाना खुराक लेनी होती है। फोलिक एसिड ऐसा ही एक विटामिन है।

गर्भस्थ मां को महसूस होने वाली असुविधा पर नजर रखने और उसे दूर करने के लिए चेकअप जरूरी है। इसमें खुद गर्भवती को शिक्षित किया जाता है कि किस तरह स्वच्छता बनाए रखे, ताकि बच्चे के विकास में बाधा न आए।


प्रीनेटल केयर में सबसे पहले शरीर के महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान देते हैं। जांचते हैं कि शरीर का तापमान क्या है, ब्लड प्रेशर सामान्य है या नहीं। ये जांच सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर होनी चाहिए। इनके अलावा सिरदर्द, बुखार, बहुत कमजोरी महसूस होना, सांस लेने में कठिनाई, पेशाब करने में दर्द, पेट में अधिक दर्द होना या हमेशा दर्द होना जैसी चीजों के बारे में ध्यान दिया जाता है।

एक रिसर्च के मुताबिक, जिन महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल नहीं होती है, उनके बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में 3 गुना कम वजन के साथ जन्म लेते हैं। ऐसी महिलाओं का मृत्यु का जोखिम भी 5 गुना बढ़ जाता है।

ध्यान रखें कि अगर महिला 18 से 35 साल के बीच की उम्र की है तो उन्हें चौथे से 13वें सप्ताह के बीच डॉक्टर के पास जरूर ले जाना चाहिए। 14वें से 28वें सप्ताह तक हर महीने में एक बार जाना चाहिए। 29वें से 35वें सप्ताह तक हर महीने में दो बार जाना होगा। 36वें सप्ताह से हर सप्ताह में एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

प्रीनेटल केयर के लिए डॉक्टर से पहली बार मिलने पर डॉक्टर गर्भवती से आहार और जीवनशैली के बारे में बात कर सकते हैं। फॉलिक एसिड के बारे में जानकारी ले सकते हैं, जिसका सेवन बहुत जरूरी है। डॉक्टर महिला के अब तक हुए इलाज और पुरानी बीमारियों की जानकारी ले सकते हैं। अगर कोई दवा या सप्लीमेंट्स ले रहे हों तो उसके बारे में पता करेंगे। ड्यू डेट का आकलन कर सकते हैं। इन सबके आधार पर कुछ टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।


गर्भावस्था की पहली तिमाही एक महत्वपूर्ण चरण है और इस समय भ्रूण तेजी से विकसित होता है और वह बहुत नाजुक भी होता है। इसलिए गर्भ में पल रहे भ्रूण की वृद्धि व विकास के लिए देखभाल बहुत जरूरी है।

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